Income Tax: होम लोन लेकर घर खरीदने से कैसे कम हो सकता है आपका टैक्स
सबसे ज्यादा टैक्स स्लैब में आने वाले लोग होम लोन लेकर टैक्स बचत कर सकते हैं। पुरानी टैक्स रीजीम में प्रिंसिपल और इंटरेस्ट पर डिडक्शन, नई रीजीम में हाउस प्रॉपर्टी लॉस सेट-ऑफ नहीं। जानिए पूरी जानकारी।
Income Tax: होम लोन लेकर घर खरीदने से कैसे कम हो सकता है आपका टैक्स
सबसे ज्यादा टैक्स स्लैब में आने वाले टैक्सपेयर्स के लिए होम लोन लेकर घर खरीदना टैक्स बचत का एक साधन हो सकता है। लेकिन टैक्स बचत का तरीका आपके द्वारा चुनी गई टैक्स रीजीम पर निर्भर करता है।
पुरानी और नई टैक्स रीजीम में अंतर
टैक्स एक्सपर्ट के अनुसार, सबसे पहले यह जांचना जरूरी है कि आपके लिए पुरानी रीजीम या नई रीजीम अधिक फायदेमंद है। कई टैक्सपेयर्स के लिए नई रीजीम फायदेमंद साबित हुई है।
पुरानी रीजीम में:
- सेक्शन 80C के तहत ₹1.5 लाख का डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है।
- NPS में निवेश करके सेक्शन 80CCD(1B) के तहत अतिरिक्त ₹50,000 का डिडक्शन लिया जा सकता है।
- होम लोन पर इंटरेस्ट पर डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है, कोई लिमिट नहीं।
- हाउस प्रॉपर्टी से हुए लॉस को अन्य इनकम के साथ सेट-ऑफ किया जा सकता है, सालाना लिमिट ₹2 लाख और बाकी लॉस अगले 8 Assessment Years में कैरी-फॉरवर्ड।
नई टैक्स रीजीम में:
- ‘इनकम फ्रॉम हाउस प्रॉपर्टी’ से हुए लॉस को अन्य इनकम के साथ सेट-ऑफ करने की अनुमति नहीं है।
- केवल होम लोन पर ब्याज की डिडक्शन की सुविधा सीमित है।
कमर्शियल प्रॉपर्टी पर डिडक्शन
पुरानी रीजीम में कमर्शियल प्रॉपर्टी पर प्रिंसिपल अमाउंट पर डिडक्शन नहीं मिलता, सिर्फ इंटरेस्ट पर डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है।
निवेश और टैक्स प्लानिंग की सलाह
होम लोन लेने से टैक्स लायबिलिटी कम होती है और एक एसेट बनता है। लेकिन टैक्स बचाने के लिए केवल रियल एस्टेट में निवेश करना उचित नहीं है। होम लोन लंबी अवधि की वित्तीय जिम्मेदारी है और इसका प्रभाव कैश फ्लो पर पड़ता है।
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