स्मार्ट टैक्स प्लानिंग 2025: नए इनकम टैक्स रेजीम में बचत के सबसे बेहतर तरीके
2025 में आयकर प्रणाली में हुए बदलावों के बाद करदाताओं के सामने नया सवाल है — पुराना टैक्स रेजीम या नया? जानिए कौन-सा विकल्प आपको अधिक बचत देगा, कौन से निवेश सबसे लाभदायक हैं, और किन योजनाओं से टैक्स में राहत मिल सकती है।
स्मार्ट टैक्स प्लानिंग 2025: नए इनकम टैक्स रेजीम में बचत के सबसे बेहतर तरीके
2025 के बजट के बाद टैक्स सिस्टम में कई अहम बदलाव हुए हैं। पुराना और नया टैक्स रेजीम दोनों ही आकर्षक दिखते हैं, लेकिन सही चुनाव आपके निवेश लक्ष्यों पर निर्भर करता है।
परिचय
भारत सरकार ने नए इनकम टैक्स रेजीम को 2023 में वैकल्पिक बनाया था, और 2025 तक यह डिफॉल्ट विकल्प बन चुका है। अब करदाताओं को यह समझना जरूरी है कि दोनों व्यवस्थाओं में कौन-सी अधिक फायदेमंद है और किन निवेश विकल्पों से अधिक टैक्स बचत संभव है।
2025 के नए बनाम पुराने टैक्स स्लैब
| आय सीमा (₹) | पुराना रेजीम टैक्स रेट | नया रेजीम टैक्स रेट (2025) |
|---|---|---|
| 0 - 3 लाख | Nil | Nil |
| 3 - 6 लाख | 5% | 5% |
| 6 - 9 लाख | 10% | 10% |
| 9 - 12 लाख | 20% | 15% |
| 12 - 15 लाख | 30% | 20% |
| 15 लाख से अधिक | 30% | 30% |
नया रेजीम सरल है और कम टैक्स दरों के साथ आता है, लेकिन इसमें अधिकांश पारंपरिक टैक्स छूटें नहीं मिलतीं।
पुराना या नया रेजीम: किसके लिए कौन बेहतर?
- पुराना रेजीम: यदि आप पहले से PPF, LIC, Home Loan Interest या NPS में निवेश करते हैं, तो यह अधिक फायदेमंद रहेगा।
- नया रेजीम: यदि आपकी आय स्थिर है और आप न्यूनतम कटौतियाँ लेते हैं, तो यह कम टैक्स दर के कारण उपयोगी है।
2025 में टैक्स सेविंग के सबसे प्रभावी निवेश विकल्प
- ELSS (Equity Linked Saving Scheme): 80C के अंतर्गत टैक्स छूट और उच्च रिटर्न का संतुलन।
- Public Provident Fund (PPF): सुरक्षित और टैक्स-फ्री ब्याज के साथ दीर्घकालिक निवेश।
- National Pension System (NPS): सेवानिवृत्ति बचत के साथ 80CCD(1B) के तहत अतिरिक्त ₹50,000 छूट।
- Health Insurance Premium: 80D के तहत ₹25,000 तक की टैक्स छूट।
- Home Loan Interest: 80EEA के तहत ₹2 लाख तक की छूट।
स्मार्ट टैक्स प्लानिंग के 5 मुख्य सिद्धांत
- साल की शुरुआत में निवेश योजना बनाएं, अंतिम तिमाही तक प्रतीक्षा न करें।
- निवेश को टैक्स बचत से जोड़ने के बजाय अपने वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार चुनें।
- लॉन्ग-टर्म योजनाओं जैसे NPS और PPF को प्राथमिकता दें।
- टैक्स-फ्री साधनों में विविधता बनाए रखें (Debt + Equity)।
- सभी कटौतियों और छूटों का समय पर दस्तावेज़ रखें।
2025 में सरकार और CBDT के नए प्रावधान
सरकार ने 2025 में टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और सरल बनाया है। अब आयकर पोर्टल पर प्री-फिल्ड इनकम, डिडक्शन और निवेश विवरण स्वचालित रूप से उपलब्ध होंगे।
निष्कर्ष
स्मार्ट टैक्स प्लानिंग का अर्थ सिर्फ छूट लेना नहीं, बल्कि अपने निवेश को दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्यों के साथ जोड़ना है। चाहे आप नया या पुराना रेजीम चुनें, नियमित समीक्षा और समय पर निवेश ही स्थायी बचत की कुंजी है।
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