क्रिप्टो करेंसी पर RBI की चेतावनी को न करें नज़रअंदाज़, नहीं तो हो सकती है आर्थिक बर्बादी
RBI ने बार-बार चेताया है कि क्रिप्टोकरेंसी मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद फंडिंग और टैक्स चोरी का जरिया बन सकती है। भारत में रेग्युलेशन की कमी से निवेशक जोखिम में हैं। कानपुर के एक रिटायर्ड बैंकर का 2.52 करोड़ का नुकसान इस खतरे की बड़ी मिसाल है।
क्रिप्टो करेंसी पर RBI की चेतावनी को न करें नज़रअंदाज़, नहीं तो हो सकती है आर्थिक बर्बादी
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) वर्षों से यह चेतावनी देता रहा है कि क्रिप्टोकरेंसी मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद फंडिंग और टैक्स चोरी जैसे गंभीर अपराधों में इस्तेमाल हो सकती है। भारत में अब तक इस पर कोई ठोस रेग्युलेशन नहीं है, जिससे निवेशकों के लिए यह एक जोखिम भरा निवेश विकल्प बना हुआ है।
रिटायर्ड बैंकर की 2.52 करोड़ की बर्बादी
कानपुर के एक रिटायर्ड बैंकर अनिल सिंह चौहान ने एक फर्जी क्रिप्टो ट्रेडिंग ऐप के झांसे में आकर 2.52 करोड़ रुपये गंवा दिए। यह रकम उनकी जीवन भर की बचत, लोन और पारिवारिक आभूषणों से जुटाई गई थी। शुरुआत एक चैट से हुई, फिर वीडियो कॉल्स और जल्दी पैसे कमाने के लालच ने उन्हें जाल में फंसा दिया।
भारत जैसे देश में जहां क्रिप्टो के लिए कोई कानूनी ढांचा नहीं है, वहां ऐसे पीड़ितों के पास न्याय पाने के सीमित विकल्प हैं। अनिल का मामला निवेशकों के लिए एक सख्त चेतावनी है।
भारत में रेग्युलेशन का अभाव
देश में क्रिप्टो रेग्युलेशन की अनुपस्थिति के बावजूद निवेशकों का उत्साह कम नहीं हुआ है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी बिटकॉइन, एथेरियम, सोलाना जैसे टोकनों में लाखों रुपये का कारोबार हो रहा है। अनुमान है कि भारत में 2 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी रूप में क्रिप्टो से जुड़े हुए हैं।
सरकार की टैक्स पॉलिसी और जोखिम
साल 2022 में सरकार ने क्रिप्टो पर 30% टैक्स और 1% TDS लगाया, लेकिन कोई सुरक्षा नहीं दी। यह टैक्स लगाना एक तरह से क्रिप्टो को अप्रत्यक्ष मान्यता देना था। न तो एक्सचेंज लाइसेंस प्राप्त हैं और न ही निवेशकों की सुरक्षा के लिए कोई KYC नियम तय हैं।
क्रिप्टो फ्रॉड के मामलों में पीड़ितों के पास FIR दर्ज कराने के अलावा कोई प्रभावी उपाय नहीं है। यह स्थिति SEBI के सख्त इक्विटी रेग्युलेशन से बिल्कुल विपरीत है।
विदेशों में सख्त नियम
- EU देशों में डिस्क्लोजर, रिजर्व फंड और एंटी मनी लॉन्ड्रिंग नियम अनिवार्य हैं।
- अमेरिका में क्रिप्टो इंटरमीडियरीज़ पर मुकदमे और दंड के उदाहरण आम हैं।
भारत के लिए रास्ता क्या?
भारत इस समय एक नीति शून्य की स्थिति में है — न तो प्रतिबंध, न ही नियंत्रण। नतीजा यह है कि हर दिन कोई न कोई निवेशक अपनी मेहनत की कमाई गवां रहा है।
जरूरत है या तो क्रिप्टो पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की या फिर इसे कड़े रेग्युलेशन के दायरे में लाने की। वित्तीय साक्षरता की कमी वाले देश में क्रिप्टो एक संगठित जुए से कम नहीं है।
निष्कर्ष
RBI की चेतावनियों को अनदेखा करना जोखिमपूर्ण है। क्रिप्टो में निवेश करने से पहले निवेशकों को सावधानी, ज्ञान और जोखिम प्रबंधन की समझ जरूरी है। लालच में किया गया निवेश आर्थिक बर्बादी का कारण बन सकता है।
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