SME IPOs ने लिस्टिंग पर दिए धमाकेदार रिटर्न, लेकिन लंबी अवधि में फुस्स साबित हुए

RBI की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, SME IPOs ने लिस्टिंग के दिन निवेशकों को शानदार रिटर्न दिए, लेकिन लंबी अवधि में उनका प्रदर्शन टिकाऊ नहीं रहा। रिपोर्ट में बताया गया है कि रिटेल निवेशकों की भीड़, ओवरवैल्यूएशन और सट्टेबाजी ने इस सेगमेंट में अस्थिरता बढ़ाई है।

Oct 23, 2025 - 10:17
Oct 25, 2025 - 13:28
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SME IPOs ने लिस्टिंग पर दिए धमाकेदार रिटर्न, लेकिन लंबी अवधि में फुस्स साबित हुए

SME IPOs ने लिस्टिंग पर दिए धमाकेदार रिटर्न, लेकिन लंबी अवधि में फुस्स साबित हुए

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की एक नई स्टडी रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि छोटी और मझोली कंपनियों (SME) के आईपीओ हाल के वर्षों में निवेशकों के बीच लोकप्रिय तो हुए हैं, लेकिन उनका लंबी अवधि का प्रदर्शन कमजोर रहा है।

इस रिपोर्ट को RBI के अर्थशास्त्रियों भाग्यश्री चट्टोपाध्याय और श्रोमोना गांगुली ने तैयार किया है। इसमें वित्त वर्ष 2024 और 2025 में लिस्ट हुईं SME कंपनियों के आईपीओ का विश्लेषण किया गया है।

लिस्टिंग डे पर शानदार रिटर्न, लेकिन टिकाऊ प्रदर्शन नहीं

रिपोर्ट में बताया गया कि कई SME IPOs ने लिस्टिंग के दिन निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न दिए, लेकिन बाद में इन शेयरों का प्रदर्शन अस्थिर रहा। RBI ने SME और मेनबोर्ड IPOs की तुलना चार अवधियों में की — एक सप्ताह, एक महीना, तीन महीने और छह महीने। परिणाम बताते हैं कि शुरुआती उछाल के बाद अधिकांश SME शेयर कमजोर हुए।

रिटेल निवेशकों की भीड़ और ओवरवैल्यूएशन का असर

रिपोर्ट के अनुसार, SME शेयरों में रिटेल निवेशकों की अत्यधिक दिलचस्पी से लिस्टिंग के समय कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ जाती हैं। सीमित शेयर आवंटन और अधिक मांग के कारण प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो कई बार इंडस्ट्री औसत से कहीं ऊपर चला जाता है।

वित्त वर्ष 2024–2025 में लिस्ट हुए लगभग 100 SME IPOs में से 20% कंपनियों का वैल्यूएशन इंडस्ट्री औसत से काफी अधिक पाया गया। निवेशक त्वरित मुनाफे की चाह में कंपनियों की वास्तविक वित्तीय स्थिति को अनदेखा कर देते हैं।

SEBI की सख्ती और नए नियम

बढ़ती अस्थिरता और सट्टेबाजी को देखते हुए SEBI ने SME IPO सेगमेंट में नए नियामकीय कदम उठाने शुरू किए हैं। इसका उद्देश्य वैल्यूएशन को यथार्थपरक बनाना और कीमतों में स्थिरता लाना है, ताकि निवेशकों का भरोसा बना रहे।

युवा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी

RBI रिपोर्ट के अनुसार, SME शेयरों में युवा निवेशकों की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। NSE के आंकड़े बताते हैं कि 30 वर्ष से कम उम्र के निवेशकों की हिस्सेदारी अब 39% हो गई है, जो 2019 में केवल 22.6% थी।

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते उपयोग और लॉक-इन नियमों की कमी ने इस सेगमेंट में सट्टा प्रवृत्ति को और बढ़ावा दिया है। अब निवेशकों की औसत आयु घटकर 33 वर्ष रह गई है।

महाराष्ट्र और गुजरात में SME लिस्टिंग का दबदबा

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो वित्त वर्षों में महाराष्ट्र SME लिस्टिंग्स में सबसे आगे रहा। इसके बाद गुजरात और दिल्ली का स्थान रहा। इन राज्यों की मजबूत औद्योगिक संरचना और सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं ने इस वृद्धि को समर्थन दिया है।

इसके अलावा, तमिलनाडु और गुजरात जैसे राज्य SME फंडरेजिंग को बढ़ावा देने के लिए विशेष नीतियां चला रहे हैं, जिससे उद्यमशीलता और औपचारिक अर्थव्यवस्था को बल मिल रहा है।

निष्कर्ष

SME IPOs ने लघु अवधि में निवेशकों को आकर्षक रिटर्न दिए, लेकिन RBI रिपोर्ट बताती है कि लंबी अवधि में उनका प्रदर्शन अस्थिर रहा। निवेशकों को चाहिए कि वे केवल लिस्टिंग लाभ के बजाय कंपनियों की फंडामेंटल्स और वित्तीय स्थिरता पर ध्यान दें।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। निवेश से पहले किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।

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