ग्रीन बॉन्ड्स और क्लाइमेट इन्वेस्टिंग: भारत में सस्टेनेबल प्रोजेक्ट्स से कमाई के अवसर

ग्रीन बॉन्ड्स और क्लाइमेट इन्वेस्टिंग के माध्यम से निवेशक अब न केवल मुनाफा कमा सकते हैं बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे सकते हैं। जानिए भारत में सस्टेनेबल फाइनेंस के बढ़ते अवसर और सरकारी ग्रीन बॉन्ड योजनाओं के लाभ।

Nov 7, 2025 - 12:12
Nov 7, 2025 - 14:42
 0  0
ग्रीन बॉन्ड्स और क्लाइमेट इन्वेस्टिंग: भारत में सस्टेनेबल प्रोजेक्ट्स से कमाई के अवसर

ग्रीन बॉन्ड्स और क्लाइमेट इन्वेस्टिंग: भारत में सस्टेनेबल प्रोजेक्ट्स से कमाई के अवसर

भारत में पर्यावरण-हितैषी निवेश का दौर शुरू हो चुका है। ग्रीन बॉन्ड्स और क्लाइमेट इन्वेस्टिंग अब निवेशकों को लाभ के साथ ज़िम्मेदारी निभाने का अवसर देते हैं।

परिचय

जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा संकट के इस दौर में, दुनिया भर में निवेशक पर्यावरण-मित्र निवेश विकल्पों की तलाश में हैं। ग्रीन बॉन्ड्स इसी दिशा में एक सशक्त साधन बन चुके हैं। भारत में भी सरकार और निजी कंपनियाँ ग्रीन फाइनेंसिंग को प्राथमिकता दे रही हैं।

ग्रीन बॉन्ड्स क्या होते हैं?

ग्रीन बॉन्ड्स ऐसे ऋण साधन होते हैं जिनसे प्राप्त राशि का उपयोग केवल पर्यावरणीय परियोजनाओं के लिए किया जाता है — जैसे कि अक्षय ऊर्जा, जल प्रबंधन, स्वच्छ परिवहन और कचरा निपटान परियोजनाएँ।

ग्रीन बॉन्ड्स क्यों महत्वपूर्ण हैं?

  • पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास में संतुलन बनाना।
  • लंबी अवधि के निवेशकों को स्थिर रिटर्न प्रदान करना।
  • सरकारी प्रोत्साहन और टैक्स लाभ के अवसर।
  • ग्लोबल ESG स्टैंडर्ड्स के अनुरूप निवेश करना।

भारत सरकार की पहलें

भारत सरकार ने 2023 में अपने पहले संप्रभु ग्रीन बॉन्ड जारी किए, जिससे ₹16,000 करोड़ जुटाए गए। इन फंड्स का उपयोग सोलर और विंड एनर्जी प्रोजेक्ट्स में किया जा रहा है। 2025 तक और अधिक सरकारी व अर्ध-सरकारी संस्थान भी इस दिशा में बॉन्ड जारी करने की योजना बना रहे हैं।

ग्रीन बॉन्ड्स से संभावित रिटर्न

  • 5% से 7% वार्षिक ब्याज दर (जारीकर्ता पर निर्भर)।
  • सरकारी बॉन्ड्स की तुलना में थोड़ी अधिक यील्ड।
  • दीर्घकालिक स्थिरता और पोर्टफोलियो में विविधता।

क्लाइमेट इन्वेस्टिंग क्या है?

क्लाइमेट इन्वेस्टिंग का उद्देश्य ऐसी कंपनियों में निवेश करना है जो कार्बन उत्सर्जन घटाने, स्वच्छ ऊर्जा अपनाने और सतत विकास के लिए कार्यरत हैं। यह निवेश केवल लाभ के लिए नहीं बल्कि पर्यावरणीय प्रभाव के लिए भी होता है।

जोखिम और सावधानियाँ

  • प्रोजेक्ट डिले और फंड मिसयूज़ का खतरा।
  • मार्केट रेट्स में बदलाव से रिटर्न प्रभावित हो सकता है।
  • कुछ ग्रीन प्रोजेक्ट्स में रिपोर्टिंग पारदर्शिता की कमी।

भारत में ग्रीन बॉन्ड्स में निवेश के विकल्प

  1. सरकारी संप्रभु ग्रीन बॉन्ड्स।
  2. PSU और कॉर्पोरेट ग्रीन बॉन्ड्स।
  3. ग्रीन म्युचुअल फंड्स या ESG ETFs।
  4. अंतरराष्ट्रीय ग्रीन बॉन्ड इंडेक्स में एक्सपोजर।

केस स्टडी: SEBI और भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर

SEBI ने ग्रीन बॉन्ड जारी करने के लिए दिशानिर्देश तय किए हैं। Tata Power, Adani Green, और NTPC जैसी कंपनियाँ पहले से ही ग्रीन प्रोजेक्ट्स के लिए ऐसे बॉन्ड्स जारी कर चुकी हैं।

भविष्य की संभावनाएँ

2025 के बाद भारत में ESG आधारित फंड्स और ग्रीन बॉन्ड्स की मांग बढ़ने की उम्मीद है। निवेशक अब सामाजिक और पर्यावरणीय असर के साथ आर्थिक लाभ भी चाहते हैं — यह डबल इम्पैक्ट इन्वेस्टिंग का युग है।

निष्कर्ष

ग्रीन बॉन्ड्स और क्लाइमेट इन्वेस्टिंग पर्यावरण और निवेश दोनों के लिए सकारात्मक दिशा में कदम हैं। आने वाले वर्षों में यह निवेश वर्ग मुख्यधारा का हिस्सा बनेगा। समझदारी यही है कि निवेशक जल्द से जल्द इस हरित लहर का हिस्सा बनें।

स्रोत

  • RBI Sovereign Green Bond Framework 2023
  • SEBI Green Bond Disclosure Guidelines
  • World Bank Green Finance Report 2024

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0