क्रेडिट स्कोर 2.0: वैकल्पिक डेटा से कैसे तय होगा आपका वित्तीय भविष्य
भारत में पारंपरिक क्रेडिट स्कोरिंग सिस्टम बदल रहा है। अब फिनटेक कंपनियाँ वैकल्पिक डेटा — जैसे डिजिटल पेमेंट्स, ऑनलाइन व्यवहार और सब्सक्रिप्शन पैटर्न — के ज़रिए आपके वित्तीय भरोसे को माप रही हैं। जानिए कैसे ‘क्रेडिट स्कोर 2.0’ आपके फाइनेंस का भविष्य तय करेगा।
क्रेडिट स्कोर 2.0: वैकल्पिक डेटा से कैसे तय होगा आपका वित्तीय भविष्य
भारत का क्रेडिट इकोसिस्टम एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अब आपके बैंकिंग इतिहास के साथ-साथ आपकी डिजिटल गतिविधियाँ भी आपके भरोसे का पैमाना बनेंगी।
परिचय
आज के डिजिटल युग में केवल बैंक लोन या क्रेडिट कार्ड पेमेंट हिस्ट्री ही नहीं, बल्कि आपकी ऑनलाइन उपस्थिति भी आपके क्रेडिट प्रोफाइल का हिस्सा बन रही है। ‘क्रेडिट स्कोर 2.0’ इसी परिवर्तन का प्रतीक है — एक नया स्कोरिंग सिस्टम जो पारंपरिक डेटा के साथ वैकल्पिक स्रोतों को भी शामिल करता है।
क्रेडिट स्कोर 2.0 क्या है?
क्रेडिट स्कोर 2.0 वह मॉडल है जो पारंपरिक वित्तीय डेटा (जैसे बैंक लोन, EMI और कार्ड बिल) के अलावा वैकल्पिक डेटा — जैसे मोबाइल पेमेंट्स, ई-कॉमर्स लेनदेन, यूटिलिटी बिल्स, और सोशल मीडिया बिहेवियर — को भी विश्लेषित करता है।
इस बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?
- भारत में लगभग 400 मिलियन लोग "न्यू-टू-क्रेडिट" हैं जिनका कोई पारंपरिक क्रेडिट इतिहास नहीं है।
- फिनटेक कंपनियों को ऐसे ग्राहकों की जोखिम-क्षमता समझने के लिए वैकल्पिक डेटा की जरूरत पड़ी।
- डिजिटल इकोनॉमी के बढ़ते प्रभाव ने नए डेटा पॉइंट्स उपलब्ध कराए हैं।
वैकल्पिक डेटा के प्रमुख स्रोत
- UPI और डिजिटल वॉलेट ट्रांजेक्शंस
- मोबाइल और इंटरनेट बिल पेमेंट्स
- ई-कॉमर्स खरीदारी का व्यवहार
- सब्सक्रिप्शन सेवाओं (OTT, मोबाइल ऐप्स) का समय पर भुगतान
- सोशल मीडिया प्रोफाइल की स्थिरता और गतिविधि
फिनटेक कंपनियाँ इस डेटा का कैसे उपयोग करती हैं?
फिनटेक प्लेटफ़ॉर्म मशी
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