दिवाली 2025: दिल्लीवालों ने 500 करोड़ के पटाखे फोड़े, बाजारों में खत्म हुआ स्टॉक
इस साल दिल्ली में दिवाली के दौरान 500 करोड़ रुपये के पटाखे बिके। सुप्रीम कोर्ट द्वारा ग्रीन पटाखों की सीमित अनुमति दिए जाने के बाद बाजारों में जबरदस्त बिक्री हुई। हालांकि, कई RWAs ने नियमों के उल्लंघन और प्रदूषण पर चिंता जताई।
दिवाली 2025: दिल्लीवालों ने 500 करोड़ के पटाखे फोड़े, बाजारों में खत्म हुआ स्टॉक
इस साल दिल्ली में दिवाली की चमक पहले से कहीं ज्यादा रही। सुप्रीम कोर्ट द्वारा ग्रीन पटाखों की सीमित अनुमति मिलने के बाद लोगों ने जमकर खरीदारी की। नतीजा यह हुआ कि त्योहार से एक दिन पहले ही कई दुकानों का स्टॉक खत्म हो गया।
कई लोग पटाखे लेने के लिए गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और सोनीपत तक पहुंच गए। व्यापारियों के अनुसार, इस साल की बिक्री ने पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ दिए। बाजारों में दिवाली की रौनक पूरी तरह लौट आई।
500 करोड़ रुपये के पटाखे बिके
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने बताया कि दुकानदारों के पास दिवाली से एक दिन पहले ही पटाखों का स्टॉक खत्म हो गया था। अनुमान है कि इस बार लगभग ₹500 करोड़ के पटाखे बिके।
दिल्ली सरकार के आदेश के अनुसार, पटाखे फोड़ने का समय सीमित था — दिवाली से एक दिन पहले और दिवाली के दिन केवल सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक।
RWAs ने जताई नाराजगी
हालांकि, कई रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWAs) ने नियमों के उल्लंघन पर नाराजगी जताई।
- बी.एस. वोहरा, अध्यक्ष, ईस्ट दिल्ली RWA जॉइंट फ्रंट ने कहा कि कई इलाकों में रात 3 बजे तक पटाखे फूटते रहे, जिससे बुजुर्गों और सांस के मरीजों को परेशानी हुई।
- अतुल गोयल, अध्यक्ष, यूनाइटेड रेजिडेंट्स जॉइंट एक्शन (URGA) ने कहा कि ग्रीन पटाखों की जानकारी और नियमों के पालन को लेकर अब भी जागरूकता की कमी है।
सुप्रीम कोर्ट की सीमित छूट और प्रदूषण की चुनौती
पिछले कुछ वर्षों से दिल्ली में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध था। इस बार सुप्रीम कोर्ट ने बेहतर एयर क्वालिटी इंडेक्स को देखते हुए सीमित समय के लिए छूट दी। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इस छूट ने दिवाली की रौनक तो बढ़ाई, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों के लिए नई चुनौती भी खड़ी की।
निष्कर्ष
दिल्ली में इस बार की दिवाली ने दिखाया कि बाजारों में त्योहार की भावना फिर से लौट आई है। हालांकि, नियमों का पालन और प्रदूषण नियंत्रण अभी भी चिंता का विषय बना हुआ है। सरकार और नागरिकों को मिलकर जिम्मेदार तरीके से त्योहार मनाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
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